Thursday, 23 August 2018

रिव्यू नहीं कराने की वजह से जिन 300 से ज्यादा फर्मों का पंजीयन निरस्त होना था, उन्हें ही नगर निगम से मिल रहे करोड़ों के काम

जेडीए में विकास कार्यों में अनियमितताओं की जांच अभी जारी है, लेकिन लगता है नगर निगम के अफसरों ने न तो इससे कोई सबक सीख रहे हैं और न ही नियमों की पालना में रुचि दिखा रहे हैं। नियम तो यह है कि अगर कोई ठेका फर्म दो साल बाद रिव्यू नहीं कराती तो उसका पंजीयन स्वत: ही रद्द हो जाता है लेकिन हकीकत यह है कि 300 से ज्यादा फर्में बिना रिव्यू कराए ही निगम से टेंडर ले रही हैं। सवाल यह है कि निगम के तकनीकी अधिकारी करोड़ों के ये टेंडर बिना दस्तावेजों की जांच किए आंखे मूंदकर ही जारी कर रहे हैं या अपनी चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने की नीयत से नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अफसरों के इस कदम से निगम को भी लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

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